उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर आयोजित विशेष कार्यक्रम ‘ए डायलॉग विद द फ्यूचर’ में जापान के यामानाशी प्रान्त से आए विद्यार्थियों और लखनऊ के विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश-जापान निवेश बैठक-2026 के क्रम में आयोजित किया गया, जिसमें यामानाशी प्रान्त के गवर्नर कोटारो नागासाकी भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में जापान से आए 13 विद्यार्थियों और उनके फैकल्टी सदस्यों ने लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने जापानी अभिवादन ‘ओहायो गोजाइमासु’ के साथ अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया।
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रदेश भारत की सभ्यतागत चेतना का महत्वपूर्ण केन्द्र है। उन्होंने अयोध्या, मथुरा, वाराणसी और सारनाथ का उल्लेख करते हुए कहा कि जापानी विद्यार्थियों की उत्तर प्रदेश यात्रा उन्हें भारत की संस्कृति, आध्यात्मिकता और इतिहास को करीब से समझने का अवसर प्रदान कर रही है। विद्यार्थियों ने आगरा में ताजमहल का भी भ्रमण किया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह केवल दो देशों के विद्यार्थियों का मिलन नहीं, बल्कि दो संस्कृतियों, परम्पराओं और युवा पीढ़ियों के बीच संवाद है। भारत और जापान के राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के निकट पहुंचने के बीच उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य के रिश्तों का संभावित राजदूत बताया। उन्होंने कहा कि भाषा और भौगोलिक दूरी अलग हो सकती है, लेकिन दोनों देशों के युवा अपने भविष्य को बेहतर बनाने की समान आकांक्षा रखते हैं।
मुख्यमंत्री ने भारत के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और जापान की सामाजिक एकजुटता की भावना में समानता बताते हुए कहा कि दोनों देश एक-दूसरे की श्रेष्ठ परम्पराओं से सीख सकते हैं। उन्होंने जापान की अनुशासन, गुणवत्ता, समयबद्धता, टीमवर्क और नवाचार की संस्कृति की सराहना की, वहीं भारत की युवा शक्ति, विविधता, प्रतिभा और रचनात्मकता को उसकी बड़ी ताकत बताया।
उन्होंने विद्यार्थियों से केवल एक-दूसरे की भाषा सीखने तक सीमित न रहने, बल्कि एक-दूसरे की भावनाओं, संस्कृतियों, मूल्यों और जीवन-दृष्टि को समझने का प्रयास करने का आह्वान किया। उनके अनुसार आज के विद्यार्थी ही आने वाले समय में वैज्ञानिक, तकनीकी विशेषज्ञ, कलाकार, खिलाड़ी, नीति-निर्माता और वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनेंगे। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन का समापन जापानी भाषा में ‘अरिगातो गोजाइमासु’ कहकर किया।
यामानाशी प्रान्त के गवर्नर कोटारो नागासाकी ने मुख्यमंत्री और लखनऊ के विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए दोनों देशों के बीच समानताओं और विविधताओं को समझना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि यह संवाद केवल एक दिन का आयोजन न रहकर विद्यार्थियों के बीच स्थायी मित्रता और सहयोग का आधार बनना चाहिए।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को और आत्मीय बना दिया। जापानी विद्यार्थियों ने जापानी भाषा में सामूहिक गीत प्रस्तुत किया, जबकि भारत की ओर से ईशान ने भगवान श्रीराम को समर्पित ‘कौशल्या दशरथ के नंदन’ गीत प्रस्तुत किया। दोनों प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि भाषाएं और संस्कृतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन संगीत और भावनाएं लोगों को आपस में जोड़ने की शक्ति रखती हैं।
लखनऊ की छात्रा अक्षरा पाण्डेय ने जापानी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय बच्चों की जापान से एक विशेष आत्मीयता रही है। उन्होंने डोरेमोन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत के अनेक बच्चे जापानी संस्कृति के कुछ पहलुओं से बचपन से ही परिचित रहे हैं। उन्होंने भारतीय परम्परा ‘अतिथि देवो भवः’ का उल्लेख करते हुए जापानी विद्यार्थियों को अतिथि नहीं, बल्कि अपना मित्र बताया।
जापानी विद्यार्थियों ने भी भारत यात्रा के अपने अनुभव साझा किए। छात्र कजामा ने भारत को अपनी पहली विदेश यात्रा बताते हुए यहां मिले आत्मीय व्यवहार और सड़कों पर दिखाई देने वाली बड़ी संख्या में मोटरसाइकिलों और वाहनों को अपने लिए नया अनुभव बताया। छात्रा मियागी मोतो ने विभिन्न संस्कृतियों को समझने और उनका सम्मान करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए भारत यात्रा को विशेष अनुभव बताया।
जापानी विद्यार्थियों ने ओरिगेमी के माध्यम से भी अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। कागज से बनाई गई सुंदर आकृतियों के जरिए उन्होंने मुख्यमंत्री को शांति और मित्रता का संदेश भेंट किया। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने जापानी और भारतीय विद्यार्थियों के साथ सेल्फी लेकर इस आत्मीय मुलाकात को यादगार बनाया।
इस प्रकार ‘ए डायलॉग विद द फ्यूचर’ केवल निवेश और आर्थिक सहयोग तक सीमित आयोजन नहीं रहा। यह भारत और जापान की युवा पीढ़ियों के बीच संस्कृति, शिक्षा, मित्रता और आपसी समझ का जीवंत मंच बन गया। यामानाशी के 13 विद्यार्थियों और लखनऊ के युवाओं की यह मुलाकात इस विश्वास के साथ आगे बढ़ी कि आज की दोस्ती आने वाले कल में भारत-जापान संबंधों की मजबूत नींव बनेगी।
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